उमेरी अहमद उर्दू की एक प्रसिद्ध उपन्यासकार और पटकथा लेखिका हैं। उन्होंने सियालकोट के मरे कॉलेज से अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की है और पहले अंग्रेज़ी की व्याख्याता के रूप में कार्यरत थीं। अहमद ने 1998 में अपनी लेखन यात्रा शुरू की, जब उन्होंने मासिक उर्दू पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित कीं, उसके बाद उन्होंने किताबें भी लिखीं। उन्होंने सोलह पुस्तकों की रचना की है, जिनमें उपन्यास और लघु कथाओं का संग्रह शामिल है। उनका उपन्यास "पीर-ए-कामिल (स.अ.व.व)" उनकी सबसे प्रमुख कृति बन गया, जिसने उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। अहमद ने अपनी शिक्षण नौकरी छोड़कर पूरी तरह से लेखन को समर्पित कर दिया, और अपनी पीढ़ी की सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली उर्दू लेखिकाओं में से एक बन गईं।.
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